ROHIT JAIN
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युवा कवि रोहित जैन की कविता ने साबित कर दिया कि:-"कविता के विषय ख़त्म कतई नहीं होते"
Posted by GIRISH BILLORE at 1:32 PM |
Thursday, Mar 27, 2008Vivek Pandey
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GIRISH BILLORE
JABALPUR, MADHAY PRADESH
जन्म- 29 नवम्बर 1962 सालिचौका नरसिंहपुर म०प्र० में।
शिक्षा- एम० कॉम०, एल एल बी
छात्रसंघ मे विभिन्न पदों पर रहकर छात्रों के बीच सांस्कृतिक साहित्यिक आंदोलन को बढ़ावा मिला और वादविवाद प्रतियोगिताओं में सक्रियता व सफलता प्राप्त की। संस्कार शिक्षा के दौर मे सान्निध्य मिला स्व हरिशंकर परसाई, प्रो हनुमान वर्मा, प्रो हरिकृष्ण त्रिपाठी, प्रो अनिल जैन व प्रो अनिल धगटे जैसे लोगों का। गीत कविता गद्य और कहानी विधाओं में लेखन तथा पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशन। म०प्र० लेखक संघ मिलन कहानीमंच से संबद्ध।
मेलोडी ऑफ लाइफ़ का संपादन, नर्मदा अमृतवाणी तथा बावरे फ़कीरा ऑडियो कैसेट व सी डी का प्रकाशन
सम्प्रति बाल विकास परियोजना अधिकारी के पद पर जबलपुर मे कार्यरत
संपर्क- girishbillore@gmail.com
http://www.anubhuti-hindi.org/kavi/g/girish_billore_mukul/index.htm
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